जिस निर्मलमति का चित्त कलि-कल्मषरूप मल से मलिन नहीं हुआ और जिसने अपने हृदय में सर्वदा श्रीजनार्दन को बसाया हुआ है, उस मनुष्य को भगवान् का अतीव भक्त समझो।
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