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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 21
कलिकलुषमलेन यस्य नात्मा विमलमतेर्मलिनीकृतोऽस्तमोहे । मनसि कृतजनार्दनं मनुष्यं सत्तमवेहि हरेरतीवभक्तम् ॥
जिस निर्मलमति का चित्त कलि-कल्मषरूप मल से मलिन नहीं हुआ और जिसने अपने हृदय में सर्वदा श्रीजनार्दन को बसाया हुआ है, उस मनुष्य को भगवान्‌ का अतीव भक्त समझो।
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