जो भगवान् के सुरवरवन्दित चरणकमलों की परमार्थबुद्धि से वन्दना करता है, घृताहुति से प्रज्जलित अग्नि के समान समस्त पाप-बन्धन से मुक्त हुए उस पुरुष को तुम दूर ही से छोड़कर निकल जाना।
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