जिस प्रकार वायु के शान्त होने पर उसमें उड़ते हुए परमाणु पृथिवी से मिलकर एक हो जाते हैं, उसी प्रकार गुण-क्षोभ से उत्पन्न हुए समस्त देवता, मनुष्य और पशु आदि (उसका अन्त हो जाने पर) उस सनातन परमात्मा में लीन हो जाते हैं।
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