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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 14
कालिंग उवाच - स्वपुरुषमभिवीक्ष्य पाशहस्तं वदति यमः किल तस्य कर्णमूले । परिहर मधुसूदनं प्रपन्नान् प्रभुरहमस्मि नृणां न वैष्णवानाम् ॥
कालिंग बोला - अपने अनुचर को हाथ में पाश लिये देखकर यमराज ने उसके कान में कहा - भगवान्‌ मधुसूदन के शरणागत व्यक्तियों को छोड़ देना; क्‍योंकि मैं, जो विष्णुभक्त नहीं हैं - ऐसे अन्य पुरुषों का ही स्वामी हूँ।
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