(हे ससवांसः) भले-बुरे के अलग-अलग करनेवाले (देवाः) विद्वानो ! आप और (वयम्) हम लोग (यवसेन) तृण, घास, भूसा से (गावः) गौ आदि पशुओं के समान (हव्येन) ग्रहण करने के योग्य (राया) धन से (मदेम) हर्षित हों और हे (मित्रावरुणा) प्राण के समान उत्तम जनो ! (युवम्) तुम दोनों (नः) हमारे लिये (विश्वाहा) सब दिनों में (अनपस्फुरन्तीम्) ठीक-ठीक ज्ञान देनेवाली (धेनुम्) वाणी को (धत्तम्) धारण कीजिये। हे यजमान ! जिससे (ते) तेरा (एषः) यह विद्याबोध (योनिः) घर है, इससे (ऋतायुभ्याम्) सत्य व्यवहार चाहनेवालों के सहित (त्वा) तुझ को हम लोग स्वीकार करते हैं
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