हे विद्वन् ! तू कौन इस यज्ञ का (गायत्रः) वेदस्थ गायत्री छन्दयुक्त मन्त्रों के समूहों से प्रतिपादित (भागः) सेवने योग्य भाग है, (इति) इस प्रकार विद्वान् से पूछ। जैसे वह विद्वान् (ते) तुझ को उस यज्ञ का यह प्रत्यक्ष भाग है, (इति) इसी प्रकार से (सोमाय) पदार्थविद्या सम्पादन करनेवाले (मे) मेरे लिये (ब्रूतात्) कहे। तू कौन इस यज्ञ का (त्रैष्टुभः) त्रिष्टुप् छन्द से प्रतिपादित (भागः) भाग है, (इति) इसी प्रकार विद्वान् से पूछ। जैसे वह (ते) तुझको उस यज्ञ का (एषः) यह भाग है, (इति) इसी प्रकार प्रत्यक्षता से समाधान (सोमाय) उत्तम रस के सम्पादन करनेवाले (मे) मेरे लिये (ब्रूतात्) कहे। तू कौन इस यज्ञ का (जागतः) जगती छन्द से कथित (भागः) अंश है, (इति) इस प्रकार आप्त से पूछ। जैसे वह (ते) तुझ को उस यज्ञ का (एषः) यह प्रसिद्ध भाग है, (इति) इसी प्रकार (सोमाय) पदार्थविद्या को सम्पादन करनेवाले (मे) मेरे लिये उत्तर (ब्रूतात्) कहे। जैसे आप (छन्दोनामानाम्) उष्णिग् आदि छन्दों के मध्य में कहे हुए यज्ञ के उपदेश में (साम्राज्यम्) भले प्रकार राज्य को (गच्छ) प्राप्त हो (इति) इसी प्रकार (सोमाय) ऐश्वर्य्ययुक्त (मे) मेरे लिये सार्वभौम राज्य की प्राप्ति होने का उपाय (ब्रूतात्) कहिये और जिस कारण आप (आस्माकाः) हम लोगों को (शुक्रः) पवित्र करनेवाले उपदेशक (असि) हैं, वैसे मैं (ते) आपके (ग्रह्यः) ग्रहण करने योग्य (विचितः) उत्तम-उत्तम धनादि द्रव्य और गुणों से संयुक्त शिष्य हूँ। आप मुझको सब गुणों से बढ़ाइये, इस कारण मैं (त्वा) आपको वृद्धियुक्त करता हूँ और सब मनुष्य (त्वा) आप वा इस यज्ञ तथा मुझको (विचिन्वन्तु) वृद्धियुक्त करें
पूरा ग्रंथ पढ़ें
यजुर्वेद के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
यजुर्वेद के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।