हे (सरस्वति) बहुत विज्ञानवाली स्त्रि ! (यः) जो (ते) तेरा (शशयः) जिसके आश्रय से बालक सोवे वह (स्तनः) दूध का आधार थन तथा (यः) जो (मयोभूः) सुख सिद्ध करनेहारा (यः) जो (रत्नधाः) उत्तम-उत्तम गुणों का धारणकर्त्ता (वसुवित्) धनों को प्राप्त होनेवाला और (यः) जो (सुदत्रः) सुन्दर दान देनेवाला पति (येन) जिसके आश्रय से (विश्वा) सब (वार्य्याणि) ग्रहण करने योग्य वस्तुओं को (पुष्यसि) पुष्ट करती है, (तम्) उसकी (इह) इस संसार में वा घर में (धातवे) धारण करने वा दूध पिलाने को नियत (अकः) कर, उससे मैं (उरु) अधिकतर (अन्तरिक्षम्) आकाश का (अन्वेमि) अनुगामी होऊँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
यजुर्वेद के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
यजुर्वेद के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।