हे मनुष्यो ! जैसे (वयम्) हम लोग (तमसः) अन्धकार से पृथक् वर्त्तमान (उत्तरम्) सब पदार्थों से उत्तर भाग में वर्त्तमान (देवत्रा) दिव्य उत्तम पदार्थों में (देवम्) उत्तम गुण-कर्म-स्वभाववाले (उत्तमम्) सबसे श्रेष्ठ (ज्योतिः) सबके प्रकाशक (सूर्य्यम्) सूर्य के तुल्य प्रकाशस्वरूप ईश्वर को (पश्यन्तः) ज्ञानदृष्टि से देखते हुए (स्वः) सुख को (परि, उत् अगन्म) सब ओर से उत्कृष्टता के साथ होवें, वैसे ही तुम लोग भी प्राप्त होओ ।
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