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यजुर्वेद • अध्याय 36 • श्लोक 14
यो वः॑ शि॒वत॑मो॒ रस॒स्तस्य॑ भाजयते॒ह नः॑। उ॒श॒तीरि॑व मा॒तरः॑ ॥
हे श्रेष्ठ स्त्रियो ! (यः) जो (वः) तुम्हारा (शिवतमः) अतिशय कल्याणकारी (रसः) आनन्दवर्द्धक स्नेहरूप रस है (तस्य) उसका (इह) इस जगत् में (नः) हमको (उशतीरिव, मातरः) पुत्रों की कामना करनेवाली माताओं के तुल्य (भाजयत) सेवा कराओ।
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