हे जीव (ते) तेरे लिये (दिशः) पूर्व आदि दिशा (शिवतमाः) अत्यन्त सुखकारिणी (कल्पन्ताम्) समर्थ हों, (तुभ्यम्) तेरे लिये (आपः) प्राण वा जल अति सुखकारी हों, (तुभ्यम्) तेरे लिये (सिन्धवः) नदियाँ वा समुद्र अति सुखकारी (भवन्तु) होवें, (तुभ्यम्) तेरे लिये (अन्तरिक्षम्) आकाश (शिवम्) कल्याणकारी हो, और (ते) तेरे लिये (सर्वाः) सब (दिशः) ईशानादि विदिशा अत्यन्त कल्याणकारी (कल्पन्ताम्) समर्थ होवें ।
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