शं वातः॒ शꣳ हि ते॒ घृणिः॒ शं ते॑ भव॒न्त्विष्ट॑काः। शं ते॑ भवन्त्व॒ग्नयः॒ पार्थि॑वासो॒ मा त्वा॒भि शू॑शुचन् ॥
हे जीव ! (ते) तेरे लिये (वातः) वायु (शम्) सुखकारी हो, (घृणिः) किरणयुक्त सूर्य्य (शम्, हि) सुखकारी हो, (इष्टकाः) वेदी में चयन की हुई र्इंटें (ते) तेरे लिये (शम्) सुखदायिनी (भवन्तु) हों, (पार्थिवासः) पृथिवी पर प्रसिद्ध (अग्नयः) विद्युत् आदि अग्नि (ते) तेरे लिये (शम्) कल्याणकारी (भवन्तु) होवें, ये सब (त्वा) तुझको (मा, अभि, शूशुचन्) सब ओर से शीघ्र शोककारी न हों ।
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