हे विद्वन् पुरुष ! आप जैसे (चिकित्वान्) ज्ञानवान् (प्रवीता) कामना करनेहारा विद्वान् जन (उत्तानायाम्) उत्कर्षता के साथ विस्तीर्ण भूमि वा अन्तरिक्ष में (वृषणम्) वर्षा के हेतु यज्ञ को (जजान) प्रकट करता और (अरुषस्तूपः) रक्षक लोगों की उन्नति करनेवाला (इडायाः) प्रशंसित स्त्री का (पुत्रः) पुत्र (वयुने) विज्ञान में (अजनिष्ट) प्रसिद्ध होता (अस्य) इसका (रुशत्) सुन्दर रूपयुक्त (पाजः) बल प्रसिद्ध होता है, वैसे (सद्यः) शीघ्र (अव, भर) अपनी ओर पुष्ट कर।
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