हे (नरः) नायक अध्यापकादि लोगो ! तुम लोग (देवान्) विद्वानों को (अभि) सब ओर से (इयक्षते) सत्कार करना चाहते हुए (अस्मै) इस (पवमानाय) पवित्र करनेहारे (इन्दवे) कोमल विद्यार्थी के लिये (उपगायत) निकटस्थ हो के शास्त्रों को पढ़ाया करो ।
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