हे (इन्द्र) परमैश्वर्यदातः विद्वन् ! हे (विष्णो) व्यापक ईश्वर ! हे (मरुतः) मनुष्यो ! तथा हे (अश्विना) अध्यापक, उपदेशक लोगो ! तुम सब (सजात्यानाम्) हमारे सहयोगी (एषाम्) इन (नः) हमारे बीच (अधि) स्वामीपन को (इत) प्राप्त होओ ।
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