हे विद्वन् ! जैसे (वनस्पतिः) वनों का रक्षक वट आदि (देवः) उत्तम गुणोंवाला (वयोधसम्) अधिक उमरवाले (देवम्) उत्तम गुणयुक्त (इन्द्रम्) ऐश्वर्य को जैसे (देवः) उत्तम सभ्यजन (देवम्) उत्तम स्वभाववाले विद्वान् को वैसे (अवर्धयत्) बढ़ावे (द्विपदा) दो पादवाले (छन्दसा) छन्द से (इन्द्रे) आत्मा में (भगम्) ऐश्वर्य तथा (इन्द्रियम्) धन को (वेतु) प्राप्त हो, वैसे (वसुधेयस्य) धनकोष के (वसुवने) धन को देनेहारे के लिए (वयः) अभीष्ट सुख को (दधत्) धारण करता हुआ तू (यज) यज्ञ कर ।
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