(यः) जो परमेश्वर (महिना) अपने व्यापकपन के महिमा से (दक्षम्) बल को (दधानाः) धारण करती (यज्ञम्) सङ्गत संसार को (जनयन्तीः) उत्पन्न करती हुई (आपः) व्याप्तिशील सूक्ष्म जल की मात्रा हैं, उनको (पर्यपश्यत्) सब ओर से देखता है, (यः) जो ईश्वर (देवेषु) उत्तम गुणवाले प्रकृति आदि और जीवों में (एकः) एक (अधि, देवः) उत्तम गुण, कर्म, स्वभाववाला (आसीत्) है, उस (चित्) ही (कस्मै) सुखस्वरूप (देवाय) सब सुखों के दाता ईश्वर की हम लोग (हविषा) आज्ञापालन और योगाभ्यास के धारण से (विधेम) सेवा करें ।
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