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यजुर्वेद • अध्याय 27 • श्लोक 12
तनू॒नपा॒दसु॑रो वि॒श्ववे॑दा दे॒वो दे॒वेषु॑ दे॒वः। प॒थो अ॑नक्तु॒ मध्वा॑ घृ॒तेन॑ ॥
हे मनुष्यो ! जो (देवेषु) उत्तम गुणवाले पदार्थों में (देवः) उत्तम गुणवाला (असुरः) प्रकाशरहित वायु (विश्ववेदाः) सब को प्राप्त होनेवाला (तनूनपात्) जो शरीर में नहीं गिरता (देवः) कामना करने योग्य (मध्वा) मधुर (घृतेन) जल के साथ (पथः) श्रोत्रादि के मार्गों को (अनक्तु) प्रकट करे, उस को तुम जानो।
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