(यत्) जो (मानुषाः) मनुष्य (ऋतुशः) ऋतु-ऋतु के योग्य (हविष्यम्) होम में चढ़ाने के पदार्थों के लिये हितकारी (देवयानम्) दिव्य गुणवाले विद्वानों की प्राप्ति कराने हारे (अश्वम्) शीघ्रगामी प्राणी की (त्रिः) तीन वार (परि, नयन्ति) सब ओर पहुँचाते हैं वा जो (अत्र) इस संसार में (पूष्णः) पुष्टिसम्बन्धी (प्रथमः) प्रथम (भागः) सेवने योग्य (देवेभ्यः) विद्वानों के लिये (यज्ञम्) सत्कार को (प्रतिवेदयन्) जनाता हुआ (अजः) विशेष पशु बकरा (एति) प्राप्त होता है, वह सदा रक्षा करने योग्य है।
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