हे मनुष्यो ! तुमको जो (कृष्णग्रीवाः) काले गले के हैं, वे (आग्नेयाः) अग्निदेवतावाले, जो (बभ्रवः) न्योले के रंगवाले हैं, वे (सौम्याः) सोम देवतावाले जो (श्वेताः) सुपेद हैं, वे (वायव्याः) वायु देवतावाले, जो (अविज्ञाताः) विशेष चिह्न से कुछ न जाने गये, वे (अदित्यै) जो कभी नाश नहीं होती उस उत्पत्तिरूप क्रिया के लिये, जो (सरूपाः) ऐसे हैं कि जिनका एकसा रूप है, वे (धात्रे) धारण करने हारे पवन के लिये। और जो (वत्सतर्यः) छोटी-छोटी बछियाँ हैं, वे (देवानाम्) सूर्य आदि लोकों की (पत्नीभ्यः) पालना करनेवाली क्रियाओं के लिये जानने चाहियें
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