हे मनुष्यो ! तुमको (एताः) ये पूर्वोक्त (द्विरूपाः) द्विरूप पशु अर्थात् जिनके दो-दो रूप हैं, वे (ऐन्द्राग्नाः) वायु और बिजुली के संगी, जो (वामनाः) टेढ़े अङ्गोंवाले व नाटे और (अनड्वाहः) बैल हैं, वे (अग्नीषोमीयाः) सोम और अग्नि देवतावाले तथा (आग्नावैष्णवाः) अग्नि और वायु देवतावाले जो (वशाः) वन्ध्या गौ हैं, वे (मैत्रावरुण्यः) प्राण और उदान देवतावाली और जो (अन्यतएन्यः) कहीं से प्राप्त हों, वे (मैत्र्यः) मित्र के प्रिय व्यवहार में जानने चाहियें।
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