हे मनुष्यो ! जो (कृष्णग्रीवाः) ऐसे हैं कि जिनकी खिंची हुई गर्दन वा खिंचा हुआ खाना निगलना वे (आग्नेयाः) अग्नि देवतावाले (शितिभ्रवः) जिनकी सुपेद भौंहें हैं, वे (वसूनाम्) पृथिवी आदि वसुओं के, जो (रोहिताः) लाल रंग के हैं, वे (रुद्राणाम्) प्राण आदि ग्यारह रुद्रों के, जो (श्वेताः) सुपेद रंग के और (अवरोकिणः) अवरोध करने अर्थात् रोकनेवाले हैं, वे (आदित्यानाम्) सूर्यसम्बन्धी महीनों के और जो (नभोरूपाः) ऐसे हैं कि जिनका जल के समान रूप है, वे जीव (पार्जन्याः) मेघदेवतावाले अर्थात् मेघ के सदृश गुणोंवाले जानने चाहियें
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