हे मनुष्यो ! तुमको (शिल्पाः) जो सुन्दर रूपवान् और शिल्पकार्यों की सिद्धि करनेवाली (वैश्वदेव्यः) विश्वेदेव देवतावाले (वाचे) वाणी के लिये (रोहिण्यः) नीचे से ऊपर को चढ़ने योग्य (त्र्यवयः) जो तीन प्रकार की भेड़ें (अदित्यै) पृथिवी के लिये (अविज्ञाताः) विशेषकर न जानी हुई भेड़ आदि (धात्रे) धारण करने के लिये (सरूपाः) एक से रूपवाली तथा (देवानाम्) दिव्यगुणवाले विद्वानों की (पत्नीभ्यः) स्त्रियों के लिये (वत्सतर्य्यः) अतीव छोटी-छोटी थोड़ी अवस्थावाली बछिया जाननी चाहिये
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