हे मनुष्यो ! तुम को जो (श्वित्रः) चित्र-विचित्र रंगवाला पशु-विशेष वह (आदित्यानाम्) समय के अवयवों के अर्थ, जो (उष्ट्रः) ऊँट (घृणीवान्) तेजस्वि विशेष पशु और (वार्ध्रीनसः) कण्ठ में जिस के थन ऐसा बड़ा बकरा है, (ते) वे सब (मत्यै) बुद्धि के लिये, जो (सृमरः) नीलगाय वह (अरण्याय) वन के लिये, जो (रुरुः) मृगविशेष है, वह (रौद्रः) रुद्र देवतावाला, जो (क्वयिः) क्वयिनाम का पक्षी (कुटरुः) मुर्गा और (दात्यौहः) कौआ हैं, (ते) वे (वाजिनाम्) घोड़ों के अर्थ और जो (पिकः) कोकिला है, वह (कामाय) काम के लिये अच्छे प्रकार जानने चाहिये
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