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यजुर्वेद • अध्याय 24 • श्लोक 21
स॒मु॒द्राय॑ शिशु॒मारा॒नाल॑भते प॒र्जन्या॑य म॒ण्डूका॑न॒द्भ्यो मत्स्या॑न् मि॒त्राय॑ कुली॒पया॒न् वरु॑णाय ना॒क्रान् ॥
हे मनुष्यो ! जैसे जल के जीवों की पालना करने को जाननेवाला जन (समुद्राय) महाजलाशय समुद्र के किये (शिशुमारान्) जो अपने बालकों को मार डालते हैं, उन शिशुमारों (पर्जन्याय) मेघ के लिये (मण्डूकान्) मेंडकों (अद्भ्यः) जलों के लिये (मत्स्यान्) मछलियों (मित्राय) मित्र के समान सुख देते हुए सूर्य्य के लिये (कुलीपयान्) कुलीपय नाम के जंगली पशुओं और (वरुणाय) वरुण के लिये (नाक्रान्) नाके मगर जलजन्तुओं को (आ, लभते) अच्छे प्रकार प्राप्त होता है, वैसे तुम भी प्राप्त होओ
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