हे मनुष्यो ! तुम जो (एताः) ये (शुनासीरीयाः) शुनासीर देवतावाले अर्थात् खेती की सिद्धि करनेवाले (सञ्चराः) आने-जाने हारे (वायव्याः) पवन के समान दिव्यगुणयुक्त (श्वेताः) सुपेद रङ्गवाले वा (सौर्याः) सूर्य के समान प्रकाशमान (श्वेताः) सुपेद रङ्ग के पशु (उक्ताः) कहे हैं, उनको अपने कार्यों में अच्छे प्रकार निरन्तर नियुक्त करो
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