हे मनुष्यो ! तुम को जो (एताः) ये (ऐन्द्राग्नाः) वायु और बिजुली देवतावाले (प्राशृङ्गाः) जिन के उत्तम सींग हैं, वे (माहेन्द्राः) महेन्द्र देवतावाले वा (बहुरूपाः) बहुत रंगयुक्त (वैश्वकर्मणाः) विश्वकर्मा देवतावाले (सञ्चराः) जिनमें अच्छे प्रकार आते-जाते हैं, वे मार्ग (उक्ताः) निरूपण किये, उनमें जाना-आना चाहिये ।
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