हे मनुष्यो ! तुम को (एताः) ये (उक्ताः) कहे हुए (सञ्चराः) जो अच्छे प्रकार चलने हारे पशु आदि हैं, वे (ऐन्द्राग्नाः) इन्द्र और अग्नि देवतावाले। जो (कृष्णाः) खींचने वा जोतने हारे हैं, वे (वारुणाः) वरुण देवतावाले और जो (पृश्नयः) चित्र-विचित्र चिह्न युक्त (मारुताः) मनुष्य के से स्वभाववाले (तूपराः) हिंसक हैं, वे (कायाः) प्रजापति देवतावाले हैं, यह जानना चाहिये।
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