हे मनुष्यो ! तुम को जो (कृष्णाः) काले रंग के वा खेत आदि के जुताईवाले हैं, वे (भौमाः) भूमि देवतावाले (धूम्राः) धुमेले हैं, वे (आन्तरिक्षाः) अन्तरिक्ष देवतावाले, जो (दिव्याः) दिव्य गुण कर्म स्वभावयुक्त (बृहन्तः) बढ़ते हुए और (शबलाः) थोड़े सुपेद हैं, वे (वैद्युताः) बिजुली देवतावाले और जो (सिध्माः) मङ्गल कराने हारे हैं, वे (तारकाः) दुःख के पार उतारनेवाले जानने चाहियें
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