हे जिज्ञासु मनुष्य ! (द्यौः) बिजुली (पूर्वचित्तिः) पहिला संचय (आसीत्) है, (अश्वः) महतत्त्व (बृहत्) बड़ा (वयः) उत्पत्ति स्वरूप (आसीत्) है, (अविः) रक्षा करनेवाली प्रकृति (पिलिप्पिला) पिलपिली (आसीत्) है, (रात्रिः) रात्रि के समान वर्त्तमान प्रलय (पिशङ्गिला) सब अवयवों को निगलनेवाला (आसीत्) है, यह तू जान
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