का स्वि॑दासीत्पू॒र्वचि॑त्तिः॒ कि॑स्वि॑दासीद् बृ॒हद्वयः॑। का स्वि॑दासीत्पिलिप्पि॒ला का स्वि॑दासीत्पिशङ्गि॒ला ॥
हे विद्वन् ! इस जगत् में (का, स्वित्) कौन (पूर्वचित्तिः) पूर्व अनादि समय में संचित होनेवाली (आसीत्) है (किं, स्वित्) क्या (बृहत्) बड़ा (वयः) उत्पन्न स्वरूप (आसीत्) है, (का, स्वित्) कौन (पिलिप्पिला) पिलपिली चिकनी (आसीत्) है और (का, स्वित्) कौन (पिशङ्गिला) अवयवों को भीतर करनेवाली (आसीत्) है, यह आपको पूछता हूँ।
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