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यजुर्वेद • अध्याय 23 • श्लोक 41
अ॒र्द्ध॒मा॒साः परू॑षि ते॒ मासा॒ऽआच्छ्य॑न्तु॒ शम्य॑न्तः। अ॒हो॒रा॒त्राणि॑ म॒रुतो॒ विलि॑ष्टꣳ सूदयन्तु ते ॥
हे विद्यार्थी लोग ! (अहोरात्राणि) दिन-रात (अर्द्धमासाः) उजेले-अंधियारे पखवाड़े और (मासाः) चैत्रादि महीने जैसे आयु अर्थात् उमरों को काटते हैं, वैसे (ते) तेरे (परूंषि) कठोर वचनों को (शम्यन्तः) शान्ति पहुँचाते हुए (मरुतः) उत्तम मनुष्य दुष्ट कामों का (आच्छ्यन्तु) विनाश करें और (ते) तेरे (विलिष्टम्) थोड़े भी कुव्यसन को (सूदयन्तु) दूर करें।
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