हे (ब्रह्मन्) चारों वेदों के जाननेवाले सज्जन ! जिन (ते) सूर्य के समान तेजस्वी आपकी (माता) पृथिवी के समान माता (च) और जिन (ते) आपका (पिता) पिता (च) भी (वृक्षस्य) संसाररूप राज्य के बीच (अग्रे) विद्या और राज्य की शोभा में (क्रीडतः) रमते हैं, उन (ते) आपका (विवक्षत इव) बहुत कहा चाहते हुए मनुष्य के मुख के समान (मुखम्) मुख है, उससे (त्वम्) तू (बहु) बहुत (मा) मत (वदः) कहा कर
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