हे (हरिवः) अच्छे उत्तम घोड़ोंवाले (इन्द्र) विद्या और ऐश्वर्य के बढ़ानेहारे विद्वन् ! आप (उपायाहि) निकट आइये (तूतुजानः) शीघ्र कार्य्यकारी होके (नः) हमारे लिये (सुते) उत्पन्न हुए व्यवहार में (ब्रह्माणि) धर्मयुक्त कर्म से प्राप्त होने योग्य धन और (चनः) भोग के योग्य अन्न को (दधिष्व) धारण कीजिये
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