हे मनुष्यो ! जैसे (पेशसा) रूप से (संवयन्ती) प्राप्त करनेहारे (पयस्वती) रात्रि के अन्धकार से युक्त (सुदुघे) अच्छे प्रकार पूर्ण करनेवाले (बृहती) बढ़ते हुए (सुरुक्मे) अच्छे प्रकाशवाले (उषासानक्ता) रात्रि और दिन (ततम्) विस्तारयुक्त (देवानाम्) पृथिव्यादिकों के (देवम्) प्रकाशक (बृहन्तम्) बड़े (इन्द्रम्) सूर्य्यमण्डल को (यजतः) संग करते हैं, वैसे ही (तन्तुम्) विस्तार करनेहारे (शूरम्) शूरवीर पुरुष को तुम लोग प्राप्त होओ।
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