हे विद्वन् ! (पूर्वकृत्) पूर्व करनेहारा (वावृधानः) बढ़ता हुआ (वज्रबाहुः) जिसके हाथ में वज्र है, वह (उषसाम्) प्रभात वेलाओं की (अनीके) सेना में जैसे (पुरोरुचा) प्रथम विथुरी हुई दीप्ति से (समिद्धः) प्रकाशित हुआ (इन्द्रः) सूर्य्य (त्रिभिः) तीन अधिक (त्रिंशता) तीस (देवैः) पृथिवी आदि दिव्य पदार्थों के साथ वर्त्तमान हुआ (वृत्रम्) मेघ को (जघान) मारता है, (दुरः) द्वारों को (वि, ववार) प्रकाशित करता है, वैसे अत्यन्त बलयुक्त योद्धाओं के साथ शत्रुओं को मार कर विद्या और धर्म के द्वारों को प्रकाशित कर।
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