हे विद्वन् ! (वयम्) हम लोग (यत्) जो (ग्रामे) गाँव में (यत्) जो (अरण्ये) जङ्गल में (यत्) जो (सभायाम्) सभा में (यत्) जो (इन्द्रिये) मन में (यत्) जो (शूद्रे) शूद्र में (यत्) जो (अर्ये) स्वामी वा वैश्य में (यत्) जो (एकस्य) एक के (अधि) ऊपर (धर्मणि) धर्म में तथा (यत्) जो और (एनः) अपराध (चकृम) करते हैं वा करनेवाले हैं (तस्य) उस सबका आप (अवयजनम्) छुड़ाने के साधन हैं, इससे महाशय (असि) हैं।
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