पव॑मानः॒ सोऽअ॒द्य नः॑ प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्षणिः। यः पोता॒ स पु॑नातु मा ॥
(यः) जो जगदीश्वर (नः) हमारे मध्य में (पवित्रेण) शुद्ध आचरण से (पवमानः) पवित्र (विचर्षणिः) विविध विद्याओं का दाता है, (सः) सो (अद्य) आज हमको पवित्र करनेवाला और हमारा उपदेशक है, (सः) सो (पोता) पवित्रस्वरूप परमात्मा (मा) मुझको (पुनातु) पवित्र करे।
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