हे मनुष्यो ! जैसे विद्वान् लोग (वेद्या) यज्ञ की सामग्री से (वेदिः) वेदि और (बर्हिषा) महान् पुरुषार्थ से (बर्हिः) बड़ा (इन्द्रियम्) धन (समाप्यते) अच्छे प्रकार प्राप्त किया जाता है, (यूपेन) मिले हुए वा पृथक्-पृथक् व्यवहार से (यूपः) मिला हुआ व्यवहार के यत्न का प्रकाश और (अग्निना) बिजुली आदि अग्नि से (प्रणीतः) अच्छे प्रकार सम्मिलित (अग्निः) अग्नि (आप्यते) प्राप्त कराया जाता है, वैसे ही तुम लोग भी साधनों से साधन मिला कर सब सुखों को प्राप्त होओ।
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