हे ईश्वर के ज्ञान चाहनेवाले मनुष्यो ! और हे (सधस्थ) समान स्थानवाले सज्जन ! (जातवेदाः) जिसको ज्ञान प्राप्त है, वह वेदार्थ को जाननेवाला (यज्ञपतिः) यज्ञ की पालना करनेवाले के समान वर्त्तमान पुरुष (यम्) जिस (शेवधिम्) सुखनिधि परमेश्वर को (आवहात्) अच्छे प्रकार प्राप्त होवे, (एतम्) इसको (अत्र) इस (परमे) परम उत्तम (व्योमन्) आकाश में व्याप्त परमात्मा को मैं (ते) तेरे लिये जैसे (परि, ददामि) सब प्रकार से देता हूँ, उपदेश करता हूँ, (अन्वागन्ता) धर्म्म के अनुकूल चलनेहारा मैं (वः) तुम सबों के लिये जिस परमेश्वर का (स्म) उपदेश करूँ, (तम्) उसको तुम (जानीत) जानो।
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