-हे विद्वन् ! सभापति जो आप (इन्दुः) चन्द्रमा के समान शीतल स्वभाव सहित (दक्षः) बल चतुराई युक्त (श्येनः) बाज के समान पराक्रमी (ऋतावा) जिनका सत्य का सम्बन्ध विद्यमान है और (हिरण्यपक्षः) सुवर्ण के लाभवाले (शकुनः) शक्तिमान् (भुरण्युः) सब के पालनेहारे (महान्) सब से बड़े (सधस्थे) दूसरे के साथ स्थान में (आ, निषत्तः) निरन्तर स्थित (ध्रुवः) निश्चल हुए (मा) मुझे (मा) मत (हिंसीः) मारो, उन (ते) आपके लिये हमारा (नमः) सत्कार (अस्तु) प्राप्त हो।
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