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यजुर्वेद • अध्याय 17 • श्लोक 83
ऋ॒त॒जिच्च॑ सत्य॒जिच्च॑ सेन॒जिच्च॑ सु॒षेण॑श्च। अन्ति॑मित्रश्च दू॒रेऽअ॑मित्रश्च ग॒णः ॥
जो (ऋतजित्) विशेष ज्ञान को बढ़ानेहारा (च) और (सत्यजित्) कारण तथा धर्म को उन्नति देनेवाला (च) और (सेनजित्) सेना को जीतनेहारा (च) और (सुषेणः) सुन्दर सेनावाला (च) और (अन्तिमित्रः) समीप में सहाय करनेहारे मित्रवाला (च) और (दूरे अमित्रः) शत्रु जिससे दूर भाग गये हों (च) और अन्य भी जो इस प्रकार का हो, वह (गणः) गिनने योग्य होता है
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