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यजुर्वेद • अध्याय 17 • श्लोक 82
ऋ॒तश्च॑ स॒त्यश्च॑ ध्रु॒वश्च॑ ध॒रुण॑श्च। ध॒र्त्ता च॑ विध॒र्त्ता च॑ विधार॒यः ॥
हे मनुष्यो ! जो (ऋतः) सत्य का जाननेवाला (च) भी (सत्यः) श्रेष्ठों में श्रेष्ठ (च) भी (ध्रुवः) निश्चययुक्त (च) भी (धरुणः) सब का आधार (च) भी (धर्त्ता) धारण करनेवाला (च) भी (विधर्त्ता) विशेष करके धारण करनेवाला अर्थात् धारकों का धारक (च) भी और (विधारयः) विशेष करके सब व्यवहार का धारण करानेवाला परमात्मा है, सब लोग उसी की उपासना करें
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