हे मनुष्यो ! जो (नीलग्रीवाः) नीली ग्रीवावाले तथा (शितिकण्ठाः) श्वेत कण्ठवाले (शर्वाः) हिंसक जीव और (अधः) नीचे को वा (क्षमाचराः) पृथिवी में चलनेवाले जीव हैं (तेषाम्) उन के (सहस्रयोजने) हजार योजन के देश में दूर करने के लिये (धन्वानि) धनुषों को हम लोग (अव, तन्मसि) विस्तृत करते हैं
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