नमः॒ शुष्क्या॑य च हरि॒त्या᳖य च॒ नमः॑ पास॒व्या᳖य च र॒ज॒स्या᳖य च॒ नमो॒ लोप्या॑य चोल॒प्या᳖य च॒ नम॒ऽऊर्व्या॑य च॒ सूर्व्या॑य च ॥
जो मनुष्य (शुष्क्याय) नीरस पदार्थों में रहने (च) और (हरित्याय) सरस पदार्थों में प्रसिद्ध को (च) भी (नमः) जलादि देवें (पांसव्याय) धूलि में रहने (च) और (रजस्याय) लोक-लोकान्तरों में रहनेवाले का (च) भी (नमः) मान करें (लोप्याय) छेदन करने में प्रवीण (च) और (उलप्याय) फेंकने में कुशल पुरुष का (च) भी (नमः) मान करें (ऊर्व्याय) मारने में प्रसिद्ध (च) और (सूर्व्याय) सुन्दरता से ताड़ना करनेवाले का (च) भी (नमः) सत्कार करें, उनके सब कार्य सिद्ध होवें
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