नमः॒ कूप्या॑य चाव॒ट्या᳖य च॒ नमो॒ वीध्र्या॑य चात॒प्या᳖य च॒ नमो॒ मेघ्या॑य च विद्यु॒त्या᳖य च॒ नमो॒ वर्ष्या॑य चाव॒र्ष्याय॑ च ॥
मनुष्य लोग (कूप्याय) कूप के (च) और (अवट्याय) गड्ढों (च) तथा जङ्गलों के जीवों को (नमः) अन्नादि दे (च) और (वीध्र्याय) विविध प्रकाशों में रहने (च) और (आतप्याय) घाम में रहनेवाले वा (च) खेती आदि के प्रबन्ध करनेवाले को (नमः) अन्न दे (मेघ्याय) मेघ में रहने (च) और (विद्युत्याय) बिजुली से काम लेनेवाले को (च) तथा अग्निविद्या के जाननेवाले को (नमः) अन्नादि दे (च) और (वर्ष्याय) वर्षा में रहने (च) तथा (अवर्ष्याय) वर्षारहित देश में वसनेवाले का (नमः) सत्कार करके आनन्दित होवें
पूरा ग्रंथ पढ़ें
यजुर्वेद के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
यजुर्वेद के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।