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यजुर्वेद • अध्याय 11 • श्लोक 44
स्थि॒रो भ॑व वी॒ड्व᳖ङ्गऽआ॒शुर्भ॑व वा॒ज्य᳖र्वन्। पृ॒थुर्भ॑व सु॒षद॒स्त्वम॒ग्नेः पु॑रीष॒वाह॑णः ॥
हे (अर्वन्) विज्ञानयुक्त पुत्र ! तू विद्याग्रहण के लिये (स्थिरः) दृढ़ (भव) हो (वाजी) नीति को प्राप्त होके (वीड्वङ्गः) दृढ़ अति बलवान् अवयवों से युक्त (आशुः) शीघ्र कर्म करनेवाला (भव) हो (त्वम्) तू (अग्नेः) अग्निसंबन्धी (सुषदः) सुन्दर व्यवहारों में स्थित और (पुरीषवाहणः) पालन आदि शुभ कर्मों को प्राप्त करानेवाला (पृथुः) सुख का विस्तार करने हारा (भव) हो
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