मैं जिस [अनिशितः] अतिविस्तृत [सपत्नक्षित्] शत्रुओं के नाश करनेवाले संग्राम से (प्रत्युष्टं रक्षः) विघ्नकारी प्राणी और जिससे (प्रत्युष्टा अरातयः) सत्यविरोधी अच्छी प्रकार दाहरूप दण्ड को प्राप्त (असि) होते हैं, वा जिस बन्धन से (निष्टप्तं रक्षः) बाँधने योग्य (निष्टप्ता अरातयः) विद्या के विघ्न करनेवाले निरन्तर संताप को प्राप्त होते हैं, (त्वा) उस (वाजिनम्) वेग आदि गुणवाले संग्राम को (वाजेध्यायै) जो कि अन्न आदि पदार्थों से बलवान् करने के योग्य सेना है, उसके लिये युद्ध के साधनों को (संमार्ज्मि) अच्छी प्रकार शुद्ध करता हूँ, अर्थात् उनके दोषों का विनाश करता हूँ और मैं जिस (सपत्नक्षित्) शत्रु का नाश करनेवाले और (अनिशिता) अति विस्तारयुक्त सेना से (प्रत्युष्टं रक्षः) परसुख का न सहनेवाला मनुष्य वा (प्रत्युष्टा अरातयः) उक्त अवगुणवाले अनेक मनुष्य (निष्टप्तं रक्षः) जुआ खेलने और परस्त्रीगमन करने तथा (निष्टप्ता अरातयः) औरों को सब प्रकार से दुःख देनेवाले मनुष्य अच्छी प्रकार निकाले जाते हैं, (त्वा) उस (वाजिनीम्) बल और वेग आदि गुणवाली सेना को (वाजेध्यायै) बहुत साधनों से प्रकाशित करने के लिये (संमार्ज्मि) अच्छी प्रकार उत्तम-उत्तम शिक्षाओं से शुद्ध करता हूँ। [यह प्रथम अर्थ हुआ] ॥ और जो कि (अनिशितः) बड़ी क्रियाओं से सिद्ध होने योग्य वा (सपत्नक्षित्) दोषों वा शत्रुओं के विनाश करनेहारे (प्रत्युष्टं रक्षः) विघ्नकारी प्राणी और (प्रत्युष्टा अरातयः) जिसमें सत्यविरोधी अच्छी प्रकार दाहरूप दण्ड को प्राप्त (असि) होते हैं, वा (निष्टप्तं रक्षः) जिस बन्धन से बाँधने योग्य (निष्टप्ता अरातयः) विद्या के विघ्न करनेवाले निरन्तर सन्ताप को प्राप्त होते हैं (त्वा) उस (वाजिनम्) यज्ञ को (वाजेध्यायै) अन्न आदि पदार्थों के प्रकाशित होने के लिये (संमार्ज्मि) शुद्धता से सिद्ध करता हूँ। इस प्रकार जिस (सपत्नक्षित्) शत्रुओं का नाश करनेवाली (अनिशिता) अतिविस्तारयुक्त क्रिया से (प्रत्युष्टं रक्षः) विघ्नकारी प्राणी और (प्रत्युष्टा अरातयः) दुर्गुण तथा नीच मनुष्य नष्ट होते हैं, (निष्टप्तं रक्षः) काम, क्रोध आदि राक्षसी भाव दूर होते हैं, (निष्टप्ता अरातयः) जिसमें दुःख तथा दुर्गन्ध आदि दोष नष्ट [(असि)] होते हैं, (त्वा) उस (वाजिनीम्) सत्क्रिया को (वाजेध्यायै) अन्न आदि पदार्थों के प्रकाशित होने के लिये (सम्मार्ज्मि) भली प्रकार सिद्ध करता हूँ। इसी प्रकार आप भी इस यज्ञ तथा सत्क्रिया को पवित्रतापूर्वक सिद्ध करो, यह दूसरा अर्थ हुआ
पूरा ग्रंथ पढ़ें
यजुर्वेद के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
यजुर्वेद के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।