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याज्ञवल्क्य • अध्याय 1 • श्लोक 25
जातस्य ग्रहोगादि कुमारस्य च धूर्तता। उपनीतेऽप्यविद्यत्वमनुद्वाहश्च पण्डिते ॥
यदि किसी प्रकार से (पुत्र) हो भी जाता है, तो उसे ग्रह, रोग आदि हो जाते हैं या फिर बालक ही नालायक हो जाता है। वह यज्ञोपवीत हो जाने के बाद भी अज्ञानी रह जाता है और यदि पढ़-लिख जाये, तो विवाह होना दुष्कर हो जाता है।
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