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याज्ञवल्क्य • अध्याय 1 • श्लोक 22
सर्वेषां दोषरत्नानां सुसमुद्गिकयानया। दु:खशृङखलया नित्यमलमस्तु मम स्त्रिया ॥
सभी तरह के दोष रत्नों की पिटारी रुष इन दु:खों को जंजीर रूपी स्त्री से तो भगवान ही बजाये।
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