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याज्ञवल्क्य • अध्याय 1 • श्लोक 20
कामनाम्ना किरातेन विकीर्णा मुग्धचेतसः । नार्यो नरविहङ्गानामङ्गबन्धनवागुराः ॥
कामदेव रूपी बहेलिये ने मानव रूपी पक्षियों को आबद्ध करने के लिए हृदय को मुग्ध (मोहित) का देने वाला स्त्रीरूपी जाल बिछा रखा है।
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